छोटे होठों की हंसी तेरी
छोटे होठों की हंसी तेरी, मुझे जिने की राह दिखाती है
जैसी काली रातों में एक आभा सी मुस्काती है,
मन हिंडोले लेती है जब तुं मुझ पर प्यार बरसाती है,
रो पड़ती है आंखें मेरी जब दूर कहीं तुं जाती है,
कहता हूं उस वक्त खुदा से, वो दूर क्यों चली जाती है
तन्हा रूठा रहता हूं क्या याद मेरी नहीं आती है
जब पास एक दिन आना है तो दूर क्यों वो जाती है
नम आंखें नहीं रूकती है जब याद तुम्हारी आती है
आ जाओ अब पास मेरे हर सांस यही दोहराती है
बढ़ जाती है धड़कन मेरी, जब बात कहीं तेरी आती है
अंकू अब तो आ जाओ तुम, मुझे चिंता तेरी सताती है
रातें गिनता रहता हूं अब नींद मुझे नहीं आती है,
कैसे बयां करूं शब्दों में किस कदर यादें रूलाती है
छोटे होठों की हंसी तेरी, मुझे जिने की राह दिखाती है....
...............बजरंग यादव
